25 Hindi Poems On love & Life – Short Hindi Poems on Love – QuotesDiaries
Hindi Poems On love & Life

25 Hindi Poems On love & Life – Short Hindi Poems on Love – QuotesDiaries


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Hindi Poems Are


Short Poems On Love In Hindi


सोचती हू तुझको सजना में दिन रात वे ,
मंगदा ना कुछ भी, बस चाहिये तेरा साथ वें…

— kavita. S. Sutar ( Mysterious Kavita )


Short Poems On Love In Hindi
Short Poems On Love In Hindi

गंध तुम्हारी रूह का , यूं घुल गया है मुझमे,
लग रहा है जैसे मेरी रूह बसी है तुझमे…

— Kavita.S.Sutar

Short Poems On Love In Hindi

Short Poems On Love In Hindi with Images
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गुनगुनाने लगे सारे ख्वाब मेरे आजकल,
ख्वाइश है के सवर जाए साथ तेरे हर पल..

— Kavita.S.Sutar

Short Poems On Love In Hindi

लाजमी है रूठना, अगर तुम ख्वाबों में ना आए….
मिलना तो नसीब नहीं
कम से कम तुमको देख तो पाए…

— Kavita.S.Sutar

Short Poems On Love In Hindi

short hindi poems on love by Misterous kavita.
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Hindi Poems For Lovers By Kavita. S. Sutar

लगता ही नहीं सवर जाए,
बिखर गए जो बहो में तुम्हारी,
दिल में जो तुम्हारे पनाह मिले हमको,
बिखरी हुई ही अच्छी है जिन्दगी हमारी।

— Kavita.S.Sutar

Hindi Poems For Lovers By Kavita. S. Sutar
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तू ही मेरी हर आरज़ू में, ती ही तो है हर गुफ्तगू में,
तू ही तो है हर पल में शामिल,
और क्या चाहिए , जब तू मुझको हासील

— Kavita.S.Sutar

Hindi Poems For Lovers By Kavita. S. Sutar
Hindi Poems For Lovers By Kavita. S. Sutar

रात सुहानी , साथ तुम्हारा,
हाथो में था हाथ तुम्हारा,
ठहरा होता वक्त वहीं पर,
काश कभी ना होता सवेरा.

— Kavita.S.Sutar

Hindi Poems For Lovers By Kavita. S. Sutar
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आज तुमसे यू रूबरू होके,
लगता है खुदा से हुई हूं रूबरू…
दिल को तुम्हारे पास खोके,
पा लिया जैसे उस खुदा को हूबहू…

— Kavita.S.Sutar

Hindi Poems For Lovers By Kavita. S. Sutar
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दिल की कशमकश में इस तरह उलझ गए,
के जिन्दगी के किस मोड़ पर मुड़ना था ये भी भूल गए ..
— Kavita.S.Sutar

Hindi Poems For Lovers By Kavita. S. Sutar
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Hindi Poems About Love

चोट लगी उसे और दर्द
इस दिल को हुआ महसूस
आज भी नहीं जानता वो के
वो अब भी है दिल में महफूज…
— Kavita.S.Sutar

Hindi Poems About Love
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दर्द अपनाता है पराए कौन
कौन सुनता है और सुनाए कौन
कौन दोहराए वो पुरानी बात
ग़म अभी सोया है जगाए कौन
वो जो अपने हैं क्या वो अपने हैं
कौन दुख झेले आज़माए कौन
अब सुकूँ है तो भूलने में है
लेकिन उस शख़्स को भुलाए कौन
आज फिर दिल है कुछ उदास उदास
देखिये आज याद आए कौन.

– जावेद अख़्तर


क्या बताऊं तुमसे मिलने की खुशी है क्या, क्या बताऊं तुम्हे छूने का एहसास है क्या, क्या बताऊं तुम्हारी आंखो में डूबना है क्या,क्या बताऊं तुम्हारी सांसों में उलझना है क्या …

— Kavita.S.Sutar

Hindi Poems About Love
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जो है ही नहीं तेरा,
वो ना होगा तेरा होकर भी….
और जो बना ही तेरे लिए हो,
उसे पाएगा तू खोकर भी…

— Kavita.S.Sutar

25 Hindi Poems On Love & Life - Short Hindi Poems On Love - QuotesDiaries
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आज फिर हमारी नज़रे मिली
वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगी
उसके होठों की हसी मुझे बहाने लगी
मुझे लगा की आज अपने दिल की बात कह दूंगा
जो होगा उसे सच मान आगे बढ़ लूँगा
मगर उसे किसी और से प्यार था
वो तो किसी और पे मरती थी और
मैं उसके लिये सिर्फ उसका एक यार था
मेरे दिल में उसके लिये सिर्फ और सिर्फ प्यार था
इसलिये मेरी हिम्मत फिर से हार गयी
उससे अपने दिल की बात कहने की
अपने दिल के जज़्बात कहने की
वो खवाहिश फिर से खत्म कर दी
ये दिल की फ़रमाइश पूरी ना हो सकी और
फिर से मेरी बात अधूरी रह गयी

– मनोहर मिश्रा


वो लोग बहुत खुश-किस्मत थे
जो इश्क़ को काम समझते थे
या काम से आशिकी करते थे
हम जीते जी मसरूफ रहे
कुछ इश्क़ किया, कुछ काम किया
काम इश्क के आड़े आता रहा
और इश्क से काम उलझता रहा
फिर आखिर तंग आ कर हमने
दोनों को अधूरा छोड दिया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़


Zindagi na milegi dobara.
इक बात होंटों तक है जो आई नहीं
बस आँखों से है झांकती
तुमसे कभी, मुझसे कभी
कुछ लफ्ज़ हैं वोह मांगती
जिनको पहनके होंटों तक आ जाए वोह
आवाज़ की बाहों में बाहें डालके इठलाये वोह
लेकिन जो येह इक बात है
अहसास ही अहसास है
खुशबू सी है जैसे हवा में तैरती
खुशबू जो बे-आवाज़ है
जिसका पता तुमको भी है
जिसकी खबर मुझको भी है
दुनिया से भी छुपता नहीं
यह जाने कैसा राज़ है

Javed Akhtar

Hindi Poems About Love
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मायूस…
मैं आईनों से तो मायूस लौट आया था
मगर किसी ने बताया बहुत हसीं हूं मैं
वो ज़र्रे ज़र्रे में मौजूद है मगर मैं भी
कहीं कहीं हूं कहां हूं कहीं नहीं हूं मैं

— राहत इंदौरी


टप टप गिरती हैं बरसातें,…
वो पत्ते रोते हैं…!
देख बहार में जीने वालों के
भी गम होते हैं…!!

– गुलज़ार

Hindi Poems About Love
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मौत से ठन गई
मौत से ठन गई
ठन गई! मौत से ठन गई!
जूझने का मेरा इरादा न था,
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था,

रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,
यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई।

मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,
ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं।

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ,
लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ?

तू दबे पाँव, चोरी-छिपे से न आ,
सामने वार कर फिर मुझे आज़मा।

मौत से बेख़बर, ज़िन्दगी का सफ़र,
शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर।

बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं,
दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं।

प्यार इतना परायों से मुझको मिला,
न अपनों से बाक़ी हैं कोई गिला।

हर चुनौती से दो हाथ मैंने किये,
आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए।

आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है,
नाव भँवरों की बाँहों में मेहमान है।

पार पाने का क़ायम मगर हौसला,
देख तेवर तूफ़ाँ का, तेवरी तन गई।

मौत से ठन गई।

— अटल बिहारी वाजपेयी


पत्तों से बारिश का रिश्ता तो देखो, इन पर बूंदे गिरते ही खिलाते है,
और कुदरत का करिश्मा तो देखो,
लगता है ये बिछड़ने के लिए ही मिलते है …

— Kavita.S.Sutar


Hindi Poems About Love

दर्द की दवा का असर
हवा हो जाये जब

तब जो दर्द लौट आया है
उसे नया मान लो

और उपाय भी उसका
नया खोजो कोई

विचारणीय मानो
मेरे इस सुझाव को

सहलाओ
नए ढंग से बार बार
पुराने घाव को

लाभ समझ में आयेंगे
कम-से-कम
पुराने घाव
पुराने नहीं हो पायेंगे!

— भवानीप्रसाद मिश्र


लफ़्ज़ एहसास-से छाने लगे, ये तो हद है
लफ़्ज़ माने भी छुपाने लगे, ये तो हद है

आप दीवार उठाने के लिए आए थे
आप दीवार उठाने लगे, ये तो हद है

ख़ामुशी शोर से सुनते थे कि घबराती है
ख़ामुशी शोर मचाने लगे, ये तो हद है

आदमी होंठ चबाए तो समझ आता है
आदमी छाल चबाने लगे, ये तो हद है

जिस्म पहरावों में छुप जाते थे, पहरावों में-
जिस्म नंगे नज़र आने लगे, ये तो हद है

लोग तहज़ीब-ओ-तमद्दुन के सलीक़े सीखे
लोग रोते हुए गाने लगे, ये तो हद है

— दुष्यंत कुमार

Hindi Poems About Love

Hindi Poem On Life – हरिवंश राय बच्चन

जो बीत गई सो बात गई •
जीवन में एक सितारा था
माना वह बेहद प्यारा था
वह डूब गया तो डूब गया
अंबर के आंगन को देखो
कितने इसके तारे टूटे
कितने इसके प्यारे छूटे
जो छूट गए फिर कहाँ मिले
पर बोलो टूटे तारों पर
कब अंबर शोक मनाता है
जो बीत गई सो बात गई
जीवन में वह था एक कुसुम
थे उस पर नित्य निछावर तुम
वह सूख गया तो सूख गया
मधुबन की छाती को देखो
सूखीं कितनी इसकी कलियाँ
मुरझाईं कितनी वल्लरियाँ
जो मुरझाईं फिर कहाँ खिलीं
पर बोलो सूखे फूलों पर
कब मधुबन शोर मचाता है

जो बीत गई सो बात गई
जीवन में मधु का प्याला था
तुमने तन मन दे डाला था
वह टूट गया तो टूट गया

मदिरालय का आँगन देखो
कितने प्याले हिल जाते हैं
गिर मिट्टी में मिल जाते हैं
जो गिरते हैं कब उठते हैं
पर बोलो टूटे प्यालों पर
कब मदिरालय पछताता है
जो बीत गई सो बात गई
मृदु मिट्टी के बने हुए
मधु घट फूटा ही करते हैं
लघु जीवन ले कर आए हैं
प्याले टूटा ही करते हैं
फ़िर भी मदिरालय के अन्दर
मधु के घट हैं, मधु प्याले हैं
जो मादकता के मारे हैं
वे मधु लूटा ही करते हैं
वह कच्चा पीने वाला है
जिसकी ममता घट प्यालों पर
जो सच्चे मधु से जला हुआ
कब रोता है चिल्लाता है
जो बीत गई सो बात गई

— हरिवंश राय बच्चन


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